बज्रेश्वरी मंदिर के अनजाने सच

बज्रेश्वरी मंदिर के अनजाने सच

हिमाचल प्रदेश को हिंदू देवताओं का निवास स्थान माना जाता है, इसलिए इसे देवभूमि कहा जाता है। पगोड़ा शैली के मंदिर, पत्थर से कोरे शिखर, सिखों के गुरुद्वारे और बौद्धों के गोम्पा ऐसे कई आधात्मिक स्थल इस भूमि पर पाए जाते है। इन सभी शांतिपूर्ण मंदिरों के बीच में बज्रेश्वरी मंदिर सुरम्य माना जाता है। इस ब्लॉग में पढ़िये इस शक्तिपीठ की जानकारी

हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले में बज्रेश्वरी मंदिर हिन्दुओं द्वारा सबसे अधिक यात्रा किये जाने वाला मंदिर है। यह आदी शक्ति के ५१ शक्ति पीठों में से एक है जो इस राज्य का मुख्य आकर्षण माना जाता है

बज्रेश्वरी मंदिर व कांगड़ा देवी मंदिर नगर कोट, कांगड़ा जिले, हिमाचल प्रदेश में स्थित है। माता वजेश्वरी देवी मंदिर को नगर कोट की देवी व कांगड़ा देवी के नाम से भी जाना जाता है और इसलिए इस मंदिर को नगर कोट धाम भी कहा जाता है। इस स्थान का वर्णन माता दुर्गो स्तुति में भी किया गया हैः-
‘सोहे अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला।।
नगर कोट में तुम्हीं बिराजत। तिहूँ लोक में डंका बाजत।।

ऐसा माना जाता है इस मंदिर का निर्माण पांडव काल में किया गया था तथा कांगड़ा का पुराना नाम नगर कोट था। वजेश्वरी मंदिर के गृव ग्रह में रज छत्र के नीचे माता एक पिण्डी के रुप में विराज मान है, इस पिंडी की ही देवी के रूप में पूजा की जाती है। वजेश्वरी मंदिर में कई देवी व देवताओं की प्रतिमा विराजमान है तथा मंदिर बायें तरफ लाल भैरव नाथ की प्रतिमा विराजमान है। भैरव नाथ भगवान शिव का ही एक अवतार है।

इस मंदिर की देवी को बज्रेश्वरी, वज्रेश्वरी, वज्रदेवी और वज्रयोगिनी के नाम से भी जाना जाता है। देवी के नाम का अर्थ है बिजली अथवा तूफान की देवी

देवी वज्रेश्वरी को देवी पार्वती या आदी-माया का लौकिक अवतार माना जाता है और इस मंदिर में उन्हें जयदुर्गा के रूप में पूजा जाता है

पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती ने उनके पिता दक्षेस्वर द्वारा किये यज्ञ कुण्ड में अपने प्राण त्याग दिये थे, तब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्माणड का चक्कर लगा रहे थे इसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को ५१ भागों में विभाजित कर दिया था, जिसमें से सती का बायां स्तन इस स्थान पर गिरा था।

अन्य ज्ञात कहानी के अनुसार, इस भव्य मंदिर का निर्माण देवी ने स्वयं इस स्थान पर आयोजित किये गए प्रसिद्ध अश्वमेध यज्ञ के समय किया था

इस मंदिर के इतिहास के अनुसार आक्रमणकारियों ने इसे कई बार लूटा है और लूट के कारण मंदिर का बहुत नुकसान हुआ है

१९०५ में हुए एक शक्तिशाली भूकंप में इस मंदिर को भारी क्षति का सामना करना पड़ा और बाद में सरकार ने इसे फिर से बनाया। १९२० में इस मंदिर का पुननिर्माण किया गया और इसे अपनी पूर्व प्रतिष्ठा में लाया गया

वर्तमान मंदिर नागरा स्थापत्य शैली में बनाया गया है। यह एक विशिष्ट संरचना है जिसमें पत्थर की दीवारें कांगड़ा किला और मुख्य शिखर के तीन गुंबदों के समान हैं।

इस मंदिर में देवी वज्रेश्वरी एक पिंडी के रूप में उपस्थित है। स्थानीय लोग इस देवी को अपनी कुलदेवी मानते है

भगवान भैरव के छोटे मंदिर के साथ, मुख्य मंदिर के समक्ष प्रसिद्ध भक्त ध्यानु भगत की मूर्ति भी रखीं गयी है

नवरात्रि और मकर संक्रांति के त्यौहार इस मंदिर में भव्यता के साथ मनाए जाते हैं।

जय हो वज्रेश्वरी मैया की !! आपको यह ब्लॉग कैसे लगा हमें कमेंट बॉक्स में बताइये और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करें

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