Category: Hindi

चित्रांगदा ! क्या आप अर्जुन की इस पत्नी के बारे में जानते है ?

चित्रांगदा ! क्या आप अर्जुन की इस पत्नी के बारे में जानते है ? अर्जुन की पत्नी द्रोपदी के बारे में हमने महाभारत की महागाथा में सुना है
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पृथु – धरती को पृथ्वी क्यों कहा जाता है? पृथ्वी का इतिहास | अर्था

क्या आपको पता है जिस धरती पर हम रहते है उसे पृथ्वी क्यों कहा जाता है। कैसे धरती को इस नाम से जाना जाने लगा। देखिए इस वीडियो
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राजा धृतवर्मा की अनकही कहानी | महाभारत | अर्था

महाभारत का महाकाव्य सिर्फ कुरुक्षेत्र के महायुद्ध पर समाप्त नहीं होता, इस महकाव्य में ऐसी कई सारी कहानियां है जिनके बारे में शायद ही हम जानते है ऐसी
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कनकदास – हरि के दिव्य भक्त | कनकदास का परिचय | उडुपी कृष्ण मंदिर | Kanakdasa Story | अर्था

कनकदास महान सन्त कवि, दार्शनिक, संगीतकार तथा वैष्णव मत के प्रचारक थे। उन्होंने हरिदास आंदोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस वीडियो में हम आपको कनकदास के जीवन
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नारियल – सौभाग्य की निशानी | Artha | Coconut | Good luck

नारियल – सौभाग्य की निशानी | Artha | Coconut | Good luck भारतीय धर्म और संस्कृति (हिन्दू धर्म या भारतीय संस्कृति) में नारियल का बहुत महत्व है। नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है।मंदिर में नारियल फोड़ने या चढ़ाने का रिवाज है। दक्षिण भारत में नारियल के पेड़ बहुतायत में पाए जाते हैं।यदि कोई यह कहता है कि नारियल की अधिकता के कारण ही नारियल को मंदिर में चढ़ाने की रस्म शुरू हुई तो यह उसके अधूरे ज्ञान का परिचय ही होगा, हिन्दू धर्म में वृक्षों के गुणों और  (विशेषताओं) की अच्छे से पहचान कर उसके महत्व को समझते हुए उसे धर्म से जोड़ा गया है। उनमें नारियल का पेड़ भी शामिल है। हिन्दू संस्कृति में नारियल का महत्वपूर्ण स्थान है और इसे संस्कृत में ‘श्री फल’ कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है भगवान का फल नारियल का इस्तेमाल हिंदू धर्म के लगभग सभी शुभ कार्यों में किया जाता है. क्या आपको मालूम है कि नारियल के कुछ आयुर्वेदिक और औषधीय गुण भी होते हैं. नारियल ज्योतिषीय रूप से भी आप पर असर डालता है| नारियल का पेड़ पांच पौराणिक देव वृक्षों या कल्प वृक्ष में से एक है, आयुर्वेदिक औषधि में, नारियल बहुत ही सम्मानित खाद्य वस्तु है, और कई इलाजों में इसका उपयोग होता है.   हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, नारियल के पेड़ की रचना ऋषि विश्वामित्र ने राजा सत्यव्रत को बचाने के लिए की थी, भारत में देवी देवताओं की मूर्ति के सामने नारियल फोडऩे का रिवाज काफी पुराना है। हिंदू धर्म के ज्यादातर धार्मिक संस्कारों में नारियल का विशेष महत्व है।कोई भी व्यक्ति जब अपना नया व्यवसाय शुरू करता है तो वह मूर्ति के सामने नारियल फोड़ता है।चाहे शादी हो, त्योहार हो या फिर कोई महत्वपूर्ण पूजा, पूजा की सामग्री में नारियल आवश्यक रूप से रहता है। नारियल फोडऩे का मतलब है कि आप अपने अहंकार और स्वयं को भगवान के सामने समर्पित कर रहे हैं। माना जाता है कि ऐसा करने पर अज्ञानता और अहंकार का कठोर कवच टूट जाता है और ये आत्मा की शुद्धता और ज्ञान का द्वार खोलता है, जिससे नारियल के सफेद हिस्से के रूप में देखा जाता है।
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पीपल के पेड़ का भारतीय संस्कृति में क्या महत्त्व है ? Artha | Peepal Tree | Sacred fig

पीपल के पेड़ का भारतीय संस्कृति में क्या महत्त्व है ? Artha | Peepal Tree | Sacred fig पीपल के पेड़ को सर्वप्रथम भारत में मोहनजोदाड़ो की मुहर पर दर्शाया हुआ पाया गया, जो की सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे पुराना शहर है।समयनुसार पीपल के  पेड़  को सामाजिक एवं धार्मिक दृश्टिकोण से पवित्र माना जाने लगा, पीपल के  पेड़ को भगवान विष्णु का प्रिय माना जाता है, भारतीय संस्कृति में पीपल देववृक्ष है, इसके सात्विक प्रभाव के स्पर्श से अन्त: चेतना पुलकित और प्रफुल्लित होती है।स्कन्द पुराण में वर्णित है कि अश्वत्थ (पीपल) के मूल में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में श्रीहरि और फलों में सभी देवताओं के साथ अच्युत सदैव निवास करते हैं। पीपल भगवान विष्णु का जीवन्त और पूर्णत:मूर्तिमान स्वरूप है।   भगवान कृष्ण कहते हैं- समस्त वृक्षों में मैं पीपल का वृक्ष हूँ।स्वयं भगवान ने उससे अपनी उपमा देकर पीपल के देवत्व और दिव्यत्व को व्यक्त किया है। शास्त्रों में वर्णित है कि पीपल की सविधि पूजा-अर्चना करने से सम्पूर्ण देवता स्वयं ही पूजित हो जाते हैं। पीपल का वृक्ष लगाने वाले की वंश परम्परा कभी विनष्ट नहीं होती।पीपल की सेवा करने वाले सद्गति प्राप्त करते हैं। पीपल वृक्ष की प्रार्थना के लिए अश्वत्थस्तोत्र में पीपल की प्रार्थना का मंत्र भी दिया गया है।प्रसिद्ध ग्रन्थ व्रतराज में अश्वत्थोपासना में पीपल वृक्ष की महिमा का उल्लेख है।अश्वत्थोपनयनव्रत में महर्षि शौनक द्वारा इसके महत्त्व का वर्णन किया गया है।अथर्ववेदके उपवेद आयुर्वेद में पीपल के औषधीय गुणों का अनेक असाध्य रोगों में उपयोग वर्णित है।पीपल के वृक्ष के नीचे मंत्र, जप और ध्यान तथा सभी प्रकार के संस्कारों को शुभ माना गया है।   श्रीमद्भागवत् में वर्णित है कि द्वापर युग में परमधाम जाने से पूर्व योगेश्वर श्रीकृष्ण इस दिव्य पीपल वृक्ष के नीचे बैठकर ध्यान में लीन हुए।यज्ञ में प्रयुक्त किए जाने वाले ‘उपभृत पात्र’ (दूर्वी, स्त्रुआ आदि) पीपल-काष्ट से ही बनाए जाते हैं।पवित्रता की दृष्टि से यज्ञ में उपयोग की जाने वाली समिधाएं भी आम या पीपल की ही होती हैं।यज्ञ में अग्नि स्थापना के लिए ऋषिगण पीपल के काष्ठ और शमी की लकड़ी की रगड़ से अग्नि प्रज्वलित किया करते थे।ग्रामीण संस्कृति में आज भी लोग पीपल की नयी कोपलों में निहित जीवनदायी गुणों का सेवन कर उम्र के अंतिम पडाव में भी सेहतमंद बने रहते हैं।हिन्दू पुराणों के अनुसार, भगवान शिव की पत्नी, देवी पार्वती द्वारा भगवान विष्णु को श्राप दिए जाने के बाद, वह पीपल के  पेड़  में बदल गए, पीपल के  पेड़  को, प्रथानुसार, माता लक्ष्मी का निवास स्थान भी माना जाता है । इसमें पृथ्वि एवं स्वर्ग के बीच संपर्क करने की क्षमताएँ भी है।   ऐसा माना  जाता है की, सभी देवी देवताए इस पेड़ के निचे उनकी सभा (परिषद ) का आयोजन करते हैं, इसलिए पीपल के पेड़ को आध्यात्मिक रूप से देखा जाता है। पीपल वही पेड़ है जहाँ माता सीता ने आश्रय लीया था ।इस  पेड़ पर बैठकर, भगवान  हनुमान ने माता सीता के साथ हो रहे सभी दुखों को देखा था ।इसलिए भगवान हनुमान के हृदय में, पीपल के पेड़ के प्रति एक ख़ास स्थान है ।भगवान बुद्ध ने पीपल के पेड़ के निचे ध्यानमग्न हो कर असीम शांति और ज्ञान की प्राप्ति की थी, इसलिए यह पेड़ बुद्ध धर्म वालों के लिए धार्मिकहै। तीर्थंकार अनंतनाथ के साथ अपने सहयोग के लिए पीपल के पेड़ की जैन धर्म में पूजा की जाती है। ‘वृक्ष आयुर्वेद’ में इस पवित्र पेड़ के वृक्षारोपण के लिए, दिए विशेष निर्देश के अनुसार, पीपल के पेड़ को घर के पश्चिमी दिशा में लगाया जाना चाहिए। खासतौर पर पीपल के पेड़ की पूजा कार्तिक महीने की जाती है।इस पवित्र पेड़ की लकड़ी को कभी भी घर में ईंधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाता, ऐसा करने से भगवान कोपित होते हैं, पर अंतिम संस्कार जैसी विधियों में हम इसका उपयोग  कर सकते हैं । जब अमावस्या सोमवार को पड़ती है।इस दिन पवित्र पीपल के पेड़ की १०८ बार परिक्रमा कर महिलाएं व्रत रख कर पूजन करती हैं।स्त्रियां संतान सुख, या मनचाहे पति की प्राप्ति और उनकी दीर्घआयु के लिए पीपल के पेड़ की परिक्रमा करती हैं ।हिन्दू धर्म में माना जाता है कि, पवित्र जग़ह या सड़कों के किनारे पीपल का पेड़ या कोई अन्य पवित्र पेड़ लगाने से, पुण्य की प्राप्ति होती है ।
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भगवद गीता – अध्याय २ – पद २ | अर्था । आध्यात्मिक विचार | भगवद गीता का ज्ञान

भगवद गीता – अध्याय २ – पद २ भगवद गीता के इस वीडियो में हम आपको बताएँगे की भगवान कृष्ण ने अर्जुन के अज्ञान के बारे में क्या
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राशि अनुसार भगवान गणेश को कौन सा नैवेद्य चढ़ाए | 2017 Astrology Predictions | Ganesh Chaturthi 2017

राशि अनुसार भगवान गणेश को कौन सा नैवेद्य चढ़ाए राशि अनुसार भगवान गणेश को कौन सा नैवेद्य चढ़ाए इस गणपति महोत्सव आप ने गणेश जी का आर्शीवाद प्राप्त
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